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बूढ़े 'आम के पेड़' ने पीएम को राखी भेजकर बचाई जान

Posted on 26-03-2015 by Kuldeep Tyagi

 
बूढ़े 'आम के पेड़' ने पीएम को राखी भेजकर बचाई जान

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई । आरे मिल्क कॉलोनी के डेढ़ सौ साल पुराने 'आम के पेड़' को बचाने की लोगों की मुहिम बुधवार को कामयाब हो गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने बुधवार को विधान परिषद में आश्वासन दिया कि आरे कॉलोनी में मेट्रो-3 का कारशेड बनाने की योजना स्थगित कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक समिति का गठन किया है, जो कारशेड के लिए वैकल्पिक स्थान सुझाएगी। क्षेत्र की हरियाली को बचाने के लिए मुहिम चलाने वाले लोगों ने बूढ़े आम के पेड़ की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं को राखी भेजकर इसे बचाने की गुहार लगाई थी।

क्या है मामला

मुंबई के गोरेगांव को पवई से जोड़ने वाली 16 वर्ग किलोमीटर की हरित पट्टी पर मेट्रो-3 परियोजना का कारशेड बनाए जाने की योजना थी। इस परियोजना के कारण आरे मिल्क कॉलोनी से 2,298 वृक्षों को या तो किसी और स्थान पर ले जाने अथवा उन्हें काटकर हटाने का फैसला लिया गया था।

महाराष्ट्र सरकार में शामिल शिवसेना सहित महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना एवं मुंबई के नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इन वृक्षों को काटने का विरोध कर रहा था। गोरेगांव के ही रहनेवाले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भी आरे कॉलोनी की हरियाली नष्ट किए जाने का खुलकर विरोध कर चुके थे।

आरे बचाओ अभियान

इन वृक्षों को बचाने के लिए नागरिकों की ओर से आरे बचाओ अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत मानव श्रृंखला बनाने से लेकर विरोध प्रदर्शन के तमाम तरीके अपनाए गए। ऐसा ही एक तरीका प्रभावशाली व्यक्तियों को राखी भेजने का भी निकाला गया।

इन दिनों बेंगलुरु में रह रहे प्रशांत कलिपुरायथ और उनके कुछ साथी आरे के वृक्षों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फड़नवीस, मुंबई महानगरपालिका आयुक्त सीताराम कुंटे एवं सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन सहित दो दर्जन से ज्यादा लोगों को राखियां भेज चुके थे। इस अभियान के तहत वनस्पतियों से बनी पर्यावरण अनुकूल राखियों के साथ एक भावनात्मक पत्र भी भेजा गया।

क्या है आरे कॉलोनी?

आजादी के बाद मुंबई महानगर के विस्तार की प्रक्रिया में शहर में स्थित दूध के तबेलों को 1949 में लगभग 16 वर्ग किलोमीटर की हरित पट्टी में स्थानांतरित किया गया था।

यहां करीब 16 हजार पशुओं के 32 तबेले हैं। यह हरित पट्टी एक तरफ संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ती है, तो दूसरी तरफ मशहूर फिल्म सिटी की पहाडि़यों से। बिमल राय की फिल्म मधुमती की शूटिंग 60 के दशक में यहीं हुई थी। अभी भी यहां बहुत से धारावाहिकों की शूटिंग होती रहती है।

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