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कोयला घोटाले में समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए मनमोहन सिंह

Posted on 26-03-2015 by Kuldeep Tyagi

 
कोयला घोटाले में समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए मनमोहन सिंह

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोयला घोटाले में आरोपी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मनमोहन ने याचिका दाखिल कर खुद को कोयला घोटाले में अभियुक्त बनाए जाने को चुनौती दी है।

उन्होंने सीबीआइ की विशेष अदालत से जारी समन निरस्त करने और याचिका का निपटारा होने तक पेशी से छूट दिए जाने की भी गुहार लगाई है। मनमोहन पर कोयला खदान आवंटन में हिंडाल्को कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है।

बिड़ला समूह के प्रमुख कुमारमंगलम बिड़ला, हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक डी. भट्टाचार्या और पूर्व कोयला सचिव पीसी परख भी सुप्रीम कोर्ट पहंुचे हैं। विशेष अदालत में पेशी की तिथि आठ अप्रैल तय है। इस कारण संभावना जताई जा रही है कि मनमोहन सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार या शुक्रवार को मामले पर जल्दी सुनवाई की गुहार लगा सकते हैं।

कुमारमंगलम बिड़ला व अन्य अभियुक्तों ने भी सुप्रीमकोर्ट से विशेष अदालत का आदेश रद करने की मांग करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। विशेष अदालत ने सिंह सहित पांच व्यक्तियों और हिंडाल्को कंपनी को भ्रष्टाचार और आइपीसी की विभिन्न धाराओं में अभियुक्त के तौर पर समन जारी करते हुए कहा था कि हिंडाल्को कंपनी को ओडिशा के तालाबीरा-2 खदान के आवंटन में अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि कुमारमंगलम बिड़ला ने यह खदान प्राप्त करने के लिए राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाया था। कोर्ट ने मनमोहन के खिलाफ भ्रष्टाचार के अलावा आपराधिक साजिश की धाराओं में भी संज्ञान लिया था।

क्या है मामला

दिल्ली की विशेष सीबीआइ अदालत ने 11 मार्च को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, हिंडाल्को कंपनी के मालिक कुमार मंगलम बिड़ला, हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक डी. भट्टाचार्या, एबीएमपीसीएस समूह के कार्यकारी अध्यक्ष शुभेंदु अमिताभ, पूर्व कोयला सचिव पीसी परख और हिंडाल्को कंपनी के खिलाफ संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किया था। विशेष अदालत ने सभी को भ्रष्टाचार और आइपीसी कानून के तहत अभियुक्त बनाते हुए आठ अप्रैल को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था।

पूर्व प्रधानमंत्री की दलील

मुझे समन जारी करने का विशेष अदालत का आदेश गलत है। इसलिए इसे रद कर दिया जाए।

-मेरे खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता। मैंने किसी को भी लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की।

-कोयला ब्लॉक आवंटन का फैसला प्रशासनिक था। फैसला लेना कोई अपराध नहीं है।

-मैंने सिर्फ सक्षम अथारिटी की हैसियत से ओडिशा सरकार की सिफारिश पर तालाबीरा-2 ब्लाक आवंटित करने का निर्णय लिया।

-फैसला लेने में चूक हो सकती है, लेकिन इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि मैंने अपने पद का दुरुपयोग किया।

-सरकार में रहकर फैसला लेना अपराध नहीं कहा जा सकता।

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